तालाब पर आवास

ज्ञानपुर। जिले में एक अनार सौ बीमार की कहावत चरितार्थ हो रही है। डीएम ने जी जहां कुछ इमानदार अफसरों की टीम के साथ जिले को दिन रात संवारने में जुटे हैं, वहीं खुलेआमिया घूसखोरी करने वाले चंद कर्मचारियों के चलते दिन रात की की मेहनत पर पानी फिर जा रहा है। ऐसे कर्मचारी खुले आम न सिर्फ तहसील के नायब और आरके बाबू के नाम पर घुस मांग रहे हैं, बल्कि जिला और तहसील प्रशासन के मेहनत पर भी पलीता लगा रहे हैं।

मामला ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के शिवसेवक पट्टी मोन गांव का है। यहां के निवासी फोटो देवी पुत्री स्व देवी शंकर को प्रधानमंत्री आवास आवंटित किया गया है। इनकी भूमिधरी जमीन भी है, लेकिन शराफत तो देखिए, यह तालाब की भूमि में आवास का निर्माण करा रही हैं। इस संबध मे गांव के लेखपाल से जब संपर्क साधा गया तो उनका अंग्रेज़ी में यह गैरजिम्मेदाराना जवाब रहा कि मैने प्रधान को सूचना दे दी है। आपको जहां रिपोर्टिंग करनी है कीजिए। मेरी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह उस लेखपाल प्रहलाद सिंह का कथन है, जिन्होंने गांव में वरासत दर्ज करने के मामले में नायाब तहसीलदार और आरके के नाम पर सरकारी दक्षिणा मांग रहे हैं। गांव के संजय मिश्रा के पिता को गुजरे करीब एक दशक बीत चुका है, लेकिन उनका वरासत तक दर्ज नहीं हो सका है। पेशे से वह पत्रकार हैं। आइए आम जनता की बात करते हैं तो गांव के ही हिन्छलाल का पिछले वर्ष निधन हो गया। उनके पुत्र आशीष जब वरासत दर्ज करने के लिए लेखपाल से संपर्क साधे तो उनसे भी सरकारी दक्षिणा की मांग की जा रही है। क्या अधिकारियों के नाम पर खुले आम घुस मांगने की इस प्रथा पर विराम भी लग पाएगी या दिन जिले के विकास को पसीना बहाने वाले ईमानदार अफसरों की साख पर इसी तरह से बट्टा लगता रहेगा। यह यक्ष प्रश्न से कम नहीं।

तो कौन है धनराशि के दुरुपयोग का जिम्मेदार

शिवसेवकपट्टी मोन गांव में तालाब पर आवास का निर्माण शुरू होने के कई दिनों बाद मीडिया के स्तर से मामला सामने आने के बाद अब सवाल यह उठता है कि इस आवास का निर्माण अब भले ही रोक दिया जाए, लेकिन इस पर खर्च सरकारी धन के लिए जिम्मेदार कौन होगा। यह विचारणीय सवाल है, जिसका उत्तर सामने आना चाहिए। साथ ही गांव में खुले आम रिश्वत मांगने वाले ऐसे लोगों की भी जांच करा कर उन्हें दंड दिया जाना चाहिए जो नई भर्ती में लेखपाली की जिम्मेदारी संभाल कर खुलेआम ग्रामीणों से अफसरों के नाम पर रिश्वत मांग रहे हैं। ऐसे चंद कर्मचारी अफसरों को बदनाम करने के साथ ही औराई के सत्ता पक्ष के विधायक दीनानाथ भाष्कर के आरोप को भी सही साबित कर रहे हैं।

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