अध्यक्ष राहुल दुबे और अन्य

भदोही। सूरज आज भी पूरब से ही ऊगा था, भले ही कुछ देर से। बादलों की दस्तक और तेज हवाओं के साथ ही सुबह-सुबह की गरज चमक यह एहसास दिला रहा थी कि काशी और प्रयाग की धरती के मध्य आज महाकाल स्वरूप पार्थिव शिवलिंग महाअनुष्ठान के बुलावे में स्वयं महादेव यहां कृपा बरसाने आ रहे हैं। तमाम तरह की बयार के बीच ही वह घड़ी भी सामने आयी जब कुछ ही पलों में चमत्कार सा लगने वाला वह नजारा भी नजर आने लगा जिसकी इतने जल्दी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। देखने ही देखते गंगा घाट सीतामढ़ी पार्थिव शिवलिंग से पट गया। अदभुत महादेव के इस स्वरूप के दर्शन को हर आकांक्षी भक्त सुबह की ही तपस्या करता नजर आया।
भक्तजन

जी हां, महर्षि बाल्मीकि की तपोस्थली, जगत जननी जानकी की समाहित स्थली और लवकुश कुमारों की जन्मस्थली सीतामढ़ी में सवा लाख पार्थिव शिवलिंग महाअनुष्ठान के पहले दिन कुछ ऐसा ही चमत्कारिक नजारा दिखा। महाकाल स्वरूप पार्थिव शिवलिंग निर्माण महाअनुष्ठान के दौरान देवाधिदेव आज भक्तों की परीक्षा लेते आए। हालांकि काशी और प्रयाग के मध्य पहले तरह का यह महाआयोजन पहले दिन भक्त स्वरूप आयोजकों की कठिन मेहनत भरी सफल परीक्षा के साथ महादेव की कृपा का हिस्सा बना।

भाजपा डीघ मंडल अध्यक्ष विधान चंद्र दुबे

स्वामी बृजेशानंद जी महराज के साथ आयोजन समिति के अध्यक्ष राहुल दुबे, कोषाध्यक्ष सुरेशचंद्र मिश्रा, विधान चंद दुबे मंडल अध्यक्ष भाजपा डीघ, राम उजागिर शुक्ल, विमल मिश्रा समेत तमाम हस्तियों की मौजूदगी में सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग महाअनुष्ठान की महामहिमा भरी झलक बाल्मीकि आश्रम से सीता समाहित स्थल तक नजर आया। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि महादेव आज सदियों बाद महर्षि बाल्मीकि की उस तपोस्थली पर चलकर आए हो जहां उनके ग्यारहवें रूद्रावतार हनुमान स्वरूप को लव कुश कुमारों ने यहीं पर श्रीराम के अश्वमेध घोड़े को रोकने के बाद बंधक बना दिया था।

यह महिमा सीतामढ़ी की है। यही पर संतशिरोमणि तुलसी दास पहुंचे तो आज भी यहां संतो का आगमन लगा रहता है। यहां निवास करने वाले कई संत उदाहरण है।

महाअनुष्ठान

महाअनुष्ठान में जब एक समय ऐसा लग रहा था कि इतने शिवलिंग बनेगे कैसे आधा से ज्यादा समय बीच चुका है तभी लोग तट पर जुटे और कुछ ही समय में पार्थिव शिवलिंग से तट का एक भू भाग पट गया। इतना जल्दी कि कल्पना से परे।

स्वामी बृजेशानंद जी महराज ने यहां के भक्तों के पार्थिव शिवलिंग स्वरूप महाकाल के दर्शन कराने के साथ ही इस महाअनुष्ठान से इस क्षेत्र की खुशहाली की बात कही। आयोजन समिति ने पहले दिन के सहयोग के लिए सभी के प्रति आभार प्रकट किया।