भदोही की बात-भदोही के साथ

भदोही। योगीराज में भी खाद्यान्न माफियाओं पर अंकुश नही लग पा रहा है। गरीबों के निवाला पर डाका डालने वाले कोटेदार कैसे शासन के तंन्त्र प्रशासनिक अफसरों को पक्ष में कर कार्रवाई होने के बाद भी राशन की दुकान का हिस्सा खाने के लिए अपने परिचित और खास कोटेदारों के यहां दुकान सम्बद्ध करा देते हैं। यह खेल खूब चल रहा है। ताजा मामला घोरहा गांव का है।

ऐसे चल रहा है खेल

ग्रामीणों की शिकायत पर कोटे की दुकाने जाँच के बाद दोषी पाए जाने पर निलम्बित कर दी जाती हैं किन्तु इसके बाद प्रभाव व पैसे का खेल चालू हो जाता हैं। कहीं स्पस्टीकरण लेकर बहाल कर दिया जाता हैं तो कहीं निलंबित कोटेदार विभागीय सेटिंग करके अपने साथी कोटेदार के यहाँ अटैच करा कर अपनी काली कमाई जारी रखते हैं।

विभागीय मिलीभगत का ताजा उदाहरण ज्ञानपुर विकास खण्ड के घोरहा गांव के प्रकरण को देखा जा सकता हैं, इस गांव के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी के यहाँ भारी संख्या में उपस्थित होकर कोटेदार की अनियमितता व दबंगई की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। जिसकी जांच तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक विजय यादव ने की थी।

भ्रष्टाचारियों के लंबे हाथ

सूत्रों की माने तो जांच में लीपापोती करने के लिए सप्लाई इंस्पेक्टर को भारी धनराशि देने की पेशकश की गयीं थी, किन्तु जांच में व्यापक गड़बड़ी मिलने पर पूर्ति निरीक्षक ने की जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी भदोही ने सात जुलाई को घोरहा का कोटा निलम्बित कर दिया।

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यह है ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने घोरहा गांव से सटे गांव में कोटा अटैच कराने का निवेदन किया किन्तु कोटेदार अपने चहेते कोटेदार के यहाँ अटैच कराने के जुगाड़ मे हैं। इस वजह से कोटा निलम्बित होने के 10 दिन बाद भी कोटा अटैच की प्रक्रिया आज तक लम्बित हैं।

ग्रामीण करेगे आमरण अनशन

कोटा अटैच न किये जाने से गाँव मे वितरण कार्य भी प्रभावित हो रहा है जिससे घोरहा गांव के लोगों में आक्रोश है । ग्रामीणों ने चेतावनी दी है की अगर निलम्बित कोटेदार की सह से कोटा अटैच किया गया तो दूसरे दिन से ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर में आमरण अनशन करेगे ।