आत्म चैतन्य

अटल जी सन 1957-58 में एक छोटी सी परेशानी जो अमूमन कब्जियत की वजह से लोगों को हो जाती है के चलते लखनऊ मेडिकल कालेज में एडमिट थे।

उस समय मेरे पिताजी डा. अमरनाथ दूबे MBBS वहीं से कर रहे थे। कोई डॉक्टर हनीफ या ऐसे ही कुछ नाम था उनके निगरानी में उनकी देखभाल थी। पिताजी भी एक मेडिकल स्टूडेंट होने के कारण उनके भी वार्ड में गए और एक सामान्य सी वार्ता हुई।

सम्भवतः उस समय अटल जी राज्यसभा के सदस्य भी रहे।
उसके पश्चात पिताजी चिकित्सा सेवा में आने पर कुछ वर्षों बाद जब सेवा से त्यागपत्र दे दिया और भदोही में निजी चिकित्सालय चलाने लगे, तब जनसंघ पार्टी को अपना भरपूर समय देने लगे।
उस समय तब पिताजी को जिला उपाध्यक्ष का सेवाभार नही मिला था। यह सन 1967 की बात है। पिताजी नगर अध्यक्ष थे।
अचानक राजा साहब जौनपुर का फोन आया कि..
डॉक्टर दुबे…! कल अटल जी का कार्यक्रम भदोही में है, एक सभा का आयोजन करो अटल जी सम्बोधित करेंगे।

अचानक से आई इस सूचना ने उस समय कब कि आज जैसी टेलीफोनिक और मीडिया की सुविधा नही थी तब भी यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गयी।
फिलहाल पिताजी ने तत्काल सारी व्यवस्था की और यह कार्यक्रम स्टेशनरोड भदोही में हुआ। जिसमें पिताजी ने अपने मित्र कैलाश व प्रकाश जायसवाल के साथ अन्य सभी कार्यकर्ताओं की भरपूर मदद ली।

और सभा बहुत अच्छी तरह से हुई।
फिलहाल…. इसतरह की कई स्मृतियां हैं।
हाँ जहां तक मुझे ज्ञात है कि उसके पहले और उसके बाद फिर अटल जी की कोई सभा भदोही में नही हुई।