भदोही। कहते हैं कि अगर कुछ खास करने का मन में दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन हो तो सफलता कदम चूम लेती है। नगर के नइबसती मोहल्ले के एक युवक को कुछ ऐसी ही कामयाबी मिली तो उनके यहां लोगों का बधाई देने के लिए तांता लगा रहा। प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार तिवारी भी मत हमराहियों के साथ पहुंच कर सफलता प्राप्त करने वाले युवक को बधाई दी।

यह ऐसा पहला मौका रहा जब पुलिस किसी को बधाई देने के लिए पहुंची थी। इससे पहले एक अपराधी को दबोचने के लिए पुलिस की धमक मोहल्ले में होती थी।
नगर के उक्त मोहल्ला निवासी स्व. फैजुल हसन के पुत्र शाहरुख फ़ैज़ यूपीएसएससी की पीसीएस परीक्षा 2016 में 87 वां रैंक पाने में सफल हुए। उन्हें सफल अभ्यर्थी के रूप में चयनित किया गया है। वे खंड विकास अधिकारी बनने में कामयाब हुए। उनकी इस सफलता पर उनके परिवार में जश्न का माहौल है। वहीं तमाम अजिज रिश्तेदार व मित्र उनको बधाई देने के लिए पहुंच रहे हैं। कोतवाल नवीन कुमार तिवारी अपने हमराहियों के साथ शाहरुख के घर पहुंच कर उन्हें बधाई दी। शाहरुख की प्रारम्भिक शिक्षा भदोही में ही हुई। उन्होंने एमए समद इंटर कालेज से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की और इंटर मीडिएट की परीक्षा मऊ में स्थित मां शकुन्तला इंटरमीडिएट कालेज से हासिल किया। वर्ष 2015 इन्होंने वाराणसी के काशी विद्यापीठ से स्नातक व उसके बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से परास्नातक की शिक्षा ग्रहण की। कुछ दिनों तक वह इलाहाबाद स्थित श्रीराम इंस्टीट्यूट से सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी। शाहरुख तीन भाई व चार बहन है। वर्ष 2004 में शाहरुख के पिता की मौत हो गई। उनकी किडनी खराब हो गई थी हालांकि शाहरुख की मां ने एक किडनी को देकर पति की जान बचाने की कोशिश की। लेकिन इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। वह बाजारु कालीन की खरीद बेच किया करते थे। जब वह दुनिया को छोड़ कर चले गए तब शाहरुख की उम्र मात्र 10 वर्ष की थी। लेकिन पढ़ने की शौक ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचा दिया। प्रथम प्रयास में ही उन्होंने यूपीएसएससी के 2016 की पीसीएस परीक्षा में 87 वां रैंक हासिल करने में सफल रहे। उन्हें खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वह बचपन से ही पढ़ाई के साथ ही साथ छोटे मोटे काम को करते हुए अपनी शिक्षा के लिए पैसे निकाल लिया करते थे। वर्तमान समय में वे एक छोटे से कालीन प्रतिष्ठान में 8 हजार रुपए मासिक की नौकरी कर रहे थे। वहीं उनके भाई दानिश अंसारी व फैजान अंसारी कालीन की धुलाई कराने का काम करते हैं। मां मुबारकुननिशा गृहणी है। सभी शाहरुख के इस कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं। उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस मौके पर हाजी यासीन अंसारी, वार्ड की सभासद रचना अरविंद मौर्य, फैजान असांरी इरशाद असांरी युसुफ व जावेद आदि ने शाहरुख को बधाई दी।