भदोही। तेरा क्या होगा कालिया ? बहुचर्चित फिल्म शोले का यह डायलाग आज के सियासी हालात पर भदोही पर पूरी तरह से सटीक बैठता है। यूपी की काशी प्रयाग की सीटों पर प्रत्याशी के एलान के बाद कई तारीखों के बीतने के बाद भी भदोही के सियासी महासमर के महारथियों की तस्वीर साफ नहीं हो पायी है। बहरहाल, इसमें बीजेपी + प्लस के प्रत्याशी को लेकर बने सस्पेंस और टिकटी जंग के बीच जनता चुनावी खुमारी से सराबोर होने लगी है और यह कहने भी लगी है कि अब तेरा क्या होगा भदोही ?

जी हां, भदोही लोकसभा क्षेत्र इस समय देश की सियासत में चर्चा का केन्द्र बिन्दु बन गया है। इसके एक नहीं अनेक कारण है, लेकिन आईपीएल के क्रिकेट मैचों के इस मौसम में सबसे बड़े रोमांच और सस्पेंस में भदोही का जनसैलाब है, जिसकी जुबां पर सिर्फ एक ही शब्द हैं क्या गुरू…भदोही का कुछ फाइनल हुआ ? यहां कौन आ रहा हैं।

एक नजर , यह है लोकसभा की आज की तस्वीर

अब आज तक के सियासी हालात और चुनावी बाजार पर नजर डाले तो बसपा-सपा गठबंधन के बाद बसपा पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र को प्रभारी बना चुकी है और वह मैदान में उतर चुके हैं। इससे इतर, भाजपा ने इस सीट पर बड़ा उलटफेर किया। भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह मस्त को भदोही की बजाए बलिया से उतार दिया है। भदोही की खाली सीट का क्या होगा ? इस पर सस्पेंस बना हुआ है। क्या यह सहयोगी दल को जाएगा या फिर बीजेपी का दांव चलेगा। इस पर बड़ा फैसला होना बाकी है। इसी पर जनता का भी यह सवाल है कि तेरा क्या होगा भदोही।

इन महारथियों की चर्चा गली – गली

लोकसभा भदोही के चुनाव में बीजेपी प्लस प्रत्याशी को लेकर जितनी चर्चा है, उससे अधिक चर्चा इस बात की है कि भदोही में अब होगा क्या। जनता में जिन नामों की चर्चा गली गली है, उसमें विधायक विजय मिश्रा का नाम सबसे अधिक चर्चित है। भदोही भाजपा विधायक रविन्द्रनाथ त्रिपाठी सरीखे नेता भी बीजेपी के पास है, तो वहीं सांसद वीरेन्द्र सिंह के करीबी, प्रतिनिधि रहे शैलेन्द्र दूबे पर भी लोगों की निगाहें हैं। चर्चा में रहे मझवां के पूर्व बसपा विधायक रमेश बिन्द के बीजेपी शामिल होने के बाद तेजी से टिकट की अटकलें अब थम गयी है, लेकिन बीजेपी के टिकट दौड़ में गोरखनाथ पांडेय, मदनलाल बिन्द और महेंन्द्र बिन्द ने भी खुद को शामिल कर लिया। महिला मोर्चा में बीजेपी नेत्री सपना दूबे का भी नाम उछला और तमाम नेता खुद को इसकी दौड़ में बता रहे हैं, तो वहीं भाजपा यह नहीं घोषित की है कि वह यहां से अपना प्रत्याशी उतारेगी या फिर बीजेपी गठबंधन की नयी सहयोगी बनी निषाद पार्टी के खाते में डालेगी। निषाद पार्टी से विजय मिश्रा विधान सभा चुनाव जीते थे, लेकिन यहां निषाद पार्टी भी तभी गठबंधन प्रत्याशी से कुछ खास मुकाबला कर सकती है, जब उसके पास दमदार प्रत्याशी हो, पार्टी के बेस के अलावा अपना भी वोट बैंक रखता हो। भदोही में ब्राहमण मतदाता चुनावी नैया का खेवनहार साबित होता रहा है। भदोही लोकसभा सीट गठन के बाद प्रथम सांसद गोरखनाथ पांडेय, द्वितीय सांसद बने वीरेन्द्र सिंह मस्त और पिछले विधानसभा चुनाव में ज्ञानपुर सीट से विधायक विजय मिश्रा इसका सबसे बड़ा प्रमाण रहे हैं। यहां, मोदी लहर में भी उनके नाम का डंका बजा था और उन्होंने लगातार चौथी जीत का इतिहास रच डाला था। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद है। इनका गठबंधन भाजपा से हुआ है। अब इस बार के चुनाव में भदोही का क्या होगा ? कौन आएगा मैदान में और कैसे होगी टक्कर इसके लिए अब आपको अधिक इंतजार नहीं करना होगा। नवरात्र में लोकतंत्र पर्व की सरगर्मी से सियासत और गरम होगी।

जल्द सामने आने वाला है प्रत्याशी का नाम, बढ़ी धड़कने…Too bee continue…!! लगातार, बने रहिए BNN के साथ।

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