जनबली और बाहुबली

भदोही। लोकसभा क्षेत्र भदोही के चुनाव का सस्पेंस थ्रिलर और रोमांच हर पल बढ़ता जा रहा है अब तो अचानक चुनावी फीवर मलेरिया का 104 डिग्री ताप बन चुका है और इसकी वजह यह है कि भदोही के “जनबली” के गढ़ में “बाहुबली” आ धमका है। बीजेपी से मोह त्याग अब बीजेपी को ही तगड़ी चुनौती पेश करने वाले इस बाहुबली को कौन रोकेगा। यह सवाल बीजेपी की साख का भी पैमाना तय कर देगा। क्यों कि बाहुबली से सिर्फ बसपा सपा गठबंधन को ही नही बल्कि समय रहते नही चेती तो बीजेपी को भी बड़ा क्षति हो सकता है।

कौन है जनबली…और क्यों ? जानिए

क्षेत्र की जनता की खुशहाली और विकास के लिए हमेशा समर्पित रहने वाला यह “जनबली” कोई और नहीं बल्कि लगातार चार बार से ज्ञानपुर के विधायक पंडित विजय मिश्रा हैं। वह इस चुनाव में अपनी जुबां से भले कुछ ना बोल रहे हैं, और जगदंबा का जप तप कर रहें हो, लेकिन दिनरात भदोही लोकसभा की जनता उन्ही के नाम का माला जप रही है । इसकी खास वजह जनबली द्वारा दिन रात अपने क्षेत्र की जनता की सेवा और विकास कार्य है। यही वजह है कि जनता के चुनावी समीकरण और दावे यही बता रहे कि सीधे तौर पर बसपा मुखिया मायावती और अखिलेश यादव की चुनौती स्वीकार कर उन्हे मात देने वाला यह जनबली हारी बाजी को भी जीत में बदलने का माद्दा रखता है। लेकिन भदोही में खुद को ही बड़ा नेता मानने वाले जनाधार विहिन कुछ नेता न सिर्फ जनबली की राह में बाधा बनते नजर आ रहे हैं, बल्कि भाजपा की नैया डूबोने के लिए दिन रात लखनऊ से दिल्ली तक दौड़ लगाते नजर आ रहे हैं। ऐसे नेताओं के पास साथ चलने को चार समर्थक तक ताैयार नहीं।

ऐसे हुई है शुरूआत, यह है बाहुबली का मिशन भदोही

आजमगढ़ के पूर्व सांसद बाहुबली रमाकांत यादव को भदोही लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस ने बीजेपी को झटका देते हुए टाटा कर लिया है। अब रमाकांत के बाय- BY करने की बारी है। अगर वह बाय को अपने पक्ष में करने में सफल रहे तो मोदी लहर में सीट हासिल करने वाली बीजेपी के गढ़ का तिलस्म टूट सकता है और बाय के सहारे चुनावी फिजां का रूख किसी ओर कर सकते हैं।

जानिए क्या है बाहुबली रमाकांत का विजन बाय (BY)

बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव परिचय के मोहताज नहीं है। आजमगढ़ सीट से पिछले चुनाव में मोदी लहर में सपा के मुलायम सिंह यादव के माथे पर शिकन ला
देने में सफल रहे रमाकांत यादव का विजन BY है कांग्रेस का पुराना ब्राहमण (B) मत और यादव (Y) मत। पिछड़ी जाति के मत में वह सेंध लगाने में सफल रहे तो बीजेपी से ब्राहमण (B) प्रत्याशी की आस निहारते थके ब्राहमण मतदाताओं का विकल्प कांग्रेस बन सकती है। यदि ऐसा हुआ तो बीजेपी का तिलस्म तार तार हो सकता है। बहरहाल, मौजूदा समय ब्राहमण मतदाता अपनी उपेक्षा को बखूबी महसूस कर अब अपनी नजरें बीजेपी के फाइनल निर्णय पर टिका दिए है।

बड़ी चुनौती, अब कैसे पार पाएगी बीजेपी

रमाकांत यादव के कांग्रेस से आने के बाद बी-यानि बिन्द मतों पर नजर गड़ाए बीजेपी का बिन्द प्रत्याशी की आस सजोए और इसी के सहारे पिछड़ी जातियों को गोलबंद करने की ख्वायिस सजाने वाली बीजेपी यदि इस भ्रम से नहीं निकली और किसी मजबूत “तेजस्वी” सरीखा ब्राहमण प्रत्याशी नहीं उतारती तो बीजेपी के लिए अपना यह किला सुरक्षित रखना आसान नहीं होगा।

भदोही सीट पर प्रत्याशी नहीं घोषित की है बीजेपी, पार्टी में हलचल

निषाद पार्टी से गठबंधन को लेकर फंसे पेंच और इस बीच अपना प्रत्याशी लड़ाने का एलान कर देने वाली बीजेपी यदि भदोही की जनता खास तौर से ब्राहमण मतदाताओं की जनभावनाओं और लंबे समय से उठ रही आवाज पर ध्यान नहीं देती तो बंटाधार से इनकार नही किया जा सकता। बहरहाल, बीजेपी खेमे में अब हलचल है। बहरहाल, बसपा परम्परा से पार नहीं पा रही बीजेपी यदि समय रहते नहीं चेती और मैदान ए जंग में बाहुबली रमाकांत यादव और बसपा के पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र के सामने किसी मजबूत तेजस्वी ब्राहमण प्रत्याशी नहीं उतारती तो उसके लिए यह सीट दिवास्वप्न साबित होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here