संबोधन

भदोही। बीजेपी की असली जीत के नायक विधायक विजय मिश्रा रहे हैं। जब जनेऊ कांड की आंच से विप्र समाज आग बबूला था तो सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा के दिशा निर्देश पर महासमर के रण में कूदे विधायक विजय मिश्रा ने सात दिनों में चुनावी तस्वीर बदलने के साथ बसपा की झोली में जाती दिख रही जीत का रास्ता बदल भाजपा के पाले मे ला दिया। आज पढ़िए, विजय मिश्रा के अतीत और वर्तमान के चुनावी जंग से जुड़ी रोचक कहानी।

माया-अखिलेश से रार, बसपा की हार

कभी सूबे की सबसे सख्त और चर्चित मुख्यमंत्री रहीं बसपा की मायावती और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को चुनौती देकर मात देने वाले पूर्वांचल के चर्चित विधायक विजय मिश्रा ने एक बार फिर दोनों को एक साथ पराजित कर दिया। जीत का सेहरा भले ही भाजपा के रमेश बिन्द के माथे पर सजा हो, लेकिन इस जीत में विजय मिश्रा की बड़ी भूमिका रही है। ज्ञानपुर और हंडिया विधान सभाओं से भाजपा को मिली बड़ी लीड ही जीत की वजह बनी। वह भी महज एक सप्ताह के अंदर। चुनाव बीत चुका है। भदोही और प्रतापपुर विधान सभाओं में भाजपा बसपा से हार गयी। बावजूद इसके सब अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन जीत का श्रेय विधायक विजय मिश्रा को सीधे तौर पर जाता है, जिन्होने भाजपा प्रत्याशी को विषम परिस्थियों में खुलेआम समर्थन देकर न सिर्फ अपने विधान सभा बल्कि हंडिया में भी बड़ी बढत बनाने में अहम भूमिका निभायी।

यह है माया-अखिलेश और विजय के जंग की कहानी

सपा में रह चुके विधायक विजय मिश्रा की सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती से पुरानी अदावत शायद ही कोई भूला हो। विजय मिश्रा ने भदोही के उप चुनाव में सपा की जीत के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती के साथ विरोध की नींव भी डाल दी थी। यह विरोध वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला, जब बसपा प्रत्याशी के रूप में गोरखनाथ पांडेय को मैदान में उतारकर तत्कालीन बसपा की मायावती सरकार में मंत्री रंगनाथ मिश्र और राकेशधर त्रिपाठी की सीधी टक्कर सपा प्रत्याशी रहे छोटेलाल बिन्द के खेवनहार बने विधायक विजय मिश्र से हुई। इसी दौरान विधायक पर गोलीकांड की घटना हुई और उन्हे फरार होना पड़ा। मायावती सरकार ने विजय मिश्रा के पीछे 11 राज्यों की पुलिस लगाकर ईनाम तक घोषित करा दिया था। विजय मिश्रा की फरारी की वजह से बसपा यह सीट दस हजार से अधिक मतों के अंतराल से जीत गयी। इस चुनाव में गोरखनाथ की नैया पार लगाने में मंत्री रंगनाथ मिश्र ने अहम भूमिका निभायी थी।

सभा को संबोधित करते विधायक विजय मिश्रा

…और जब सपा में शुरू हुआ युद्ध

वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में अखिलेश यादव के साथ विजय मिश्रा की सियासी अदावत खुलेआम शुरू हुई। इस अदावत की शुरूआत विजय मिश्रा का टिकट कटने से हुई। इस चुनाव में मोदी लहर के बाद भी निषाद पार्टी से विजय मिश्रा ना सिर्फ अपनी सीट बचाने में सफल रहे बल्कि भदोही, प्रयागराज, जौनपुर और मिर्जापुर-सोनभद्र से सपा के सफाए में अहम भूमिका निभायी, लेकिन वर्ष 2009 के गोरखनाथ के चुनाव का हिसाब किताब बाकी ही था।

जिसका उन्हे था इंतजार…वो घड़ी आ गयी, आ गयी…देखिए

2019 में वह घड़ी भी आ गयी, जब वर्ष 2009 के कसर का हिसाब और मायावती और अखिलेश यादव को भदोही और प्रयागराज की धरती पर मात देने को विधायक विजय मिश्रा ने भाजपा को समर्थन देने के लिए धनापुर में मीटिंग बुलायी। छोटी सूचना पर इस मीटिंग में जब दस हजार से अधिक भीड़ हुई तो ही तय हो गया था हंडिया और ज्ञानपुर से बसपा का सूपड़ा साफ तय है। हुआ भी ऐसा ही। भाजपा प्रत्याशी रमेश बिन्द को सबसे बड़ी लीड ज्ञानपुर से ही मिली। इस विधानसभा मे भाजपा को 1,09,760 और बसपा को मात्र 81,589 वोट ही मिले। हंडिया में भाजपा 99,187 वोट मिला और बसपा को 84,929 मत मिले। दोनों विधान सभाओं में विधायक विजय मिश्रा कूदे थे और दोनों से मिली तगड़ी लीड जीत की वजह बनी।

भदोही और प्रतापपुर में भाजपा हारी

भाजपा भदोही विधान सभा हार गयी। यहां विधायक रविन्द्रनाथ त्रिपाठी ने रंगनाथ के खिलाफ मोर्चा संभाला था। भदोही में बसपा को 1,10,833 वोट मिले जबकि भाजपा को 1,04,084 वोट ही मिले। औराई में भाजपा ने बढ़त ली तो प्रतापपुर में साढ़े चार सौ से अधिक मतों से भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर भाजपा प्रत्याशी के जीत में बड़ी भूमिका निभाकर विधायक विजय मिश्रा ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव का हिसाब किताब बराबर कर लिया, वहीं भाजपा की जीत के लिए संकल्प के साथ दिए गए समर्थन का वचन भी निभाया।

जीते…तो विजय हैं

भदोही लोकसभा चुनाव भले ही भाजपा के रमेश जीते हैं, लेकिन मायावती, अखिलेश यादव के साथ ही रंगनाथ को पराजित कर विजय मिश्रा ने फिर एक बार विजय गर्जना के साथ विजय पताका लहरा कर यह जता दिया है कि विजय मिश्रा को इसलिए पूर्वांचल में जनबली कहा जाता है।

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